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AAKHIRI LADAI (Hindi Edition)


Price: ₹ 74.00
(as of May 01,2021 10:46:09 UTC – Details)


मुसीबत जब किसी दूसरे पर आती है तो उतना भय नहीं देती। मुसीबत जब दूसरे मुहल्ले, दूसरे शहर और दूसरे देश पर आती है तब तो और भी कम महसूस होती है। पर जब वही मुसीबत अपने आप पर, अपने घर में और अपने बाल बच्चों पर आ जाती है तब वह असली मुसीबत होती है।
यही कोरोना के साथ हुआ। जब यह चीन, अमेरिका या यूरोप तक सीमित थी, इसे साधारण रूप से लिया गया। पर जब यह अपने देश व फिर अपने शहर तक आ गई तो इसकी भयंकरता का अहसास हुआ।
दुखन सेठ व उनके पु़त्र रविप्रकाश ने भी पहले इसकी भयंकरता को नहीं पहचाना। उन्होंने भी समझा कि यह फ्लू जैसी बीमारी है जो समय के साथ कम और फिर समाप्त हो जाएगी। पर देर ना लगी, जब उन्होंने अच्छी तरह से समझ लिया कि यह बीमारी रहने वाली है। काफी समय तक साथ रहने वाली है। इससे बचाव के लिए सावधानियाॅं सालों साल रखनी पड़ेंगी। पर एक झटके में इसने जितना नुक्सान कर दिया था व अपूर्णीय था।
एक साधारण परिवार को इस कोरोना वाइरस ने किस तरह से अपने प्रभाव में लिया, व इस परिवार ने किस तरह से इसकी भयंकरता को समझा, इस की यही कहानी है। और साथ ही किस तरह से इसके साथ साथ रहने की आदत डाली यह भी बताया। शायद आज विश्व के हर परिवार की यही कहानी है।

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